WorldVeterinary Day: क्या आप एक घायल बाघ के करीब जाने की हिम्मत करेंगे? ये डॉक्टर रोज़ यही करते हैं! 🐅🩺
शनिवार, 25 अप्रैल 2026
Comment
जयपुर. आज पूरा विश्व 'विश्व पशु चिकित्सा दिवस' मना रहा है। यह दिन उन डॉक्टरों को समर्पित है जो बोल न पाने वाले जीवों के दर्द को समझते हैं और उन्हें नया जीवन देते हैं। इसी कड़ी में आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे जांबाज वन्यजीव पशु चिकित्सक की, जिन्होंने अपना पूरा जीवन जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण में झोंक दिया है। जयपुर में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अरविन्द माथुर ऐसे ही इंसान हैं, जिन्होंने अब तक सैकड़ों वन्यजीवों को नया जीवन दिया है। वन्यजीव संरक्षण के उत्कृष्ट कार्यों के लिए डॉ. माथुर को राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा, उन्हें वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में 20 से ज्यादा प्रशस्ति पत्र और मेडल मिल चुके हैं।
14 जिलों में 82 लेपर्ड रेस्क्यू, बना रिकॉर्ड
डॉ. माथुर ने अब तक 14 जिलों में 82 लेपर्ड का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित बचाया है। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम लिम्का और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में दर्ज है। शहर की आबादी के बीच कई बार उन्हें बेहद संकरी जगहों और गुस्सैल भीड़ के बीच वन्यजीवों को ट्रॅकुलाइज करना पड़ा। एक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक लेपर्ड ने उन पर हमला भी कर दिया था। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन ठीक होते ही वे फिर से उसी जज्बे के साथ अपने काम पर लौट आए। डॉ माथुर ने रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा और रामगढ में 40 से ज्यादा बाघों को ट्रॅक्यूलाइज कर रेस्क्यू, ट्रीटमेंट और रेडियो कॉलरिंग सफलतापूर्वक की है।
50 से ज्यादा वन्यजीवों की सर्जरी
डॉ. माथुर का ट्रैक रिकॉर्ड किसी उपलब्धि से कम नहीं है। उन्होंने अब तक अपनी विशेषज्ञता से 50 से ज्यादा बाघों, शेरों और लेपर्ड की सर्जरी की है। चाहे बात किसी घायल बाघ के ऑपरेशन की हो या बीमार शेरनी को स्वस्थ करने की, उनकी सूझबूझ और चिकित्सकीय कौशल ने कई बार नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। डॉ. माथुर ने यूके, साउथ अफ्रीका और वनतारा में आधुनिक वन्यजीव चिकित्सा का प्रशिक्षण भी लिया है।
अनाथ शावकों के लिए बने 'मां '
मां से दूर हुए बाघ, शेर और लेपर्ड के कई नवजात शावकों के लिए भी डॉ. माथुर मसीहा बनकर उभरे हैं। 5 बाघ शावक, 4 लेपर्ड शावक और शेर के 1 नवजात शावक को डॉ. माथुर ने देखरेख कर नया जीवन दिया है। इनमें से बाघिन के दो शावकों की डॉ. माथुर नियोनेटल केयर यूनिट में देखरेख कर रहे हैं। इन नवजातों को बोतल से दूध पिलाया जा रहा है।
14 जिलों में 82 लेपर्ड रेस्क्यू, बना रिकॉर्ड
डॉ. माथुर ने अब तक 14 जिलों में 82 लेपर्ड का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित बचाया है। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम लिम्का और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में दर्ज है। शहर की आबादी के बीच कई बार उन्हें बेहद संकरी जगहों और गुस्सैल भीड़ के बीच वन्यजीवों को ट्रॅकुलाइज करना पड़ा। एक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक लेपर्ड ने उन पर हमला भी कर दिया था। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन ठीक होते ही वे फिर से उसी जज्बे के साथ अपने काम पर लौट आए। डॉ माथुर ने रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा और रामगढ में 40 से ज्यादा बाघों को ट्रॅक्यूलाइज कर रेस्क्यू, ट्रीटमेंट और रेडियो कॉलरिंग सफलतापूर्वक की है।
50 से ज्यादा वन्यजीवों की सर्जरी
डॉ. माथुर का ट्रैक रिकॉर्ड किसी उपलब्धि से कम नहीं है। उन्होंने अब तक अपनी विशेषज्ञता से 50 से ज्यादा बाघों, शेरों और लेपर्ड की सर्जरी की है। चाहे बात किसी घायल बाघ के ऑपरेशन की हो या बीमार शेरनी को स्वस्थ करने की, उनकी सूझबूझ और चिकित्सकीय कौशल ने कई बार नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। डॉ. माथुर ने यूके, साउथ अफ्रीका और वनतारा में आधुनिक वन्यजीव चिकित्सा का प्रशिक्षण भी लिया है।
अनाथ शावकों के लिए बने 'मां '
मां से दूर हुए बाघ, शेर और लेपर्ड के कई नवजात शावकों के लिए भी डॉ. माथुर मसीहा बनकर उभरे हैं। 5 बाघ शावक, 4 लेपर्ड शावक और शेर के 1 नवजात शावक को डॉ. माथुर ने देखरेख कर नया जीवन दिया है। इनमें से बाघिन के दो शावकों की डॉ. माथुर नियोनेटल केयर यूनिट में देखरेख कर रहे हैं। इन नवजातों को बोतल से दूध पिलाया जा रहा है।
0 Response to "WorldVeterinary Day: क्या आप एक घायल बाघ के करीब जाने की हिम्मत करेंगे? ये डॉक्टर रोज़ यही करते हैं! 🐅🩺"
एक टिप्पणी भेजें