Rajasthan: इंतजार शास्त्र की जगह करें इजहार नामा: तिवाड़ी
शनिवार, 4 अप्रैल 2026
Comment
जयपुर। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इंतजार शास्त्र पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में शास्त्र तो 64 ही हुए है, शास्त्र जैसे पवित्र शब्द के साथ इंतजार जोड़ना नहीं चाहिए। वे चाहे तो इजहार नामा कर सकते है। गहलोत हारने के बाद अपनी उपेक्षा से पीड़ित होकर हताशा का इजहार कर सकते है। गहलोत जब—जब मुख्यमंत्री बने, उसके बाद उन्होंने पार्टी को रसातल में पहुंचाया और सत्ता भाजपा के पास आई। इसके चलते कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें साइड लाइन कर दिया। कांग्रेस पार्टी को रतोतल में पहुंचाने वाले गहलोत साहब को दिल्ली में पायलट और राजस्थान में डोटासरा जी के चलते तवज्जो नहीं दी जा रही, ऐसे में वे सोशल मीडिया पर अपने कार्यों का इजहार कर रहे है। तिवाड़ी ने पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के कार्यकाल पर कटाक्ष करते हुए कहा कि "फूलां बाई फूलगी, गेल का दिन भूलगी" लोकोक्ति अशोक गहलोत पर चरितार्थ हो रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत अपना कार्यकाल कैसे भूल गए, जब प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपरलीक हुए और प्रदेश के युवाओं के साथ कुठाराघात किया गया। गहलोत कैसे भूल गए कि प्रदेश के लिए महत्वकांक्षी परियोजना ईआरसीपी और यमुना जल समझौते को कांग्रेस सरकार ने लटकाने का कार्य किया। गहलोत कैसे भूल गए कि जेजेएम घोटाले में उनकी सरकार के मंत्री से लेकर विभाग के अधिकारी तक जेल पहुंच गए। गहलोत के कार्यकाल में युवा रोजगार के लिए इंतजार कर रहे थे, पेपरलीक रूकने का इंतजार कर रहे थे, बहन—बेटियां सुरक्षा का इंतजार कर रही थी, किसान जमीन बचाने का इंतजार कर रहे थे और जनता भ्रष्टाचार से मुक्ति का इंतजार कर रही थी।
सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि सोशल मीडिया पर गहलोत सीरीज चला रहे है, जबकि आईपीडी टॉवर प्रोजेक्ट से लेकर टेंडर प्रक्रिया तक अनियमितताओं से भरा हुआ था। गहलोत सरकार के आंकलन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके ही कार्यकाल में परियोजना की लागत 400 करोड़ रुपए से बढ़कर 700 करोड़ रूपए हो गई, 1 हजार 500 बेड वाले टावर के लिए पार्किंग व्यवस्था सिर्फ 190 की गई। यह उनकी जल्दबाजी एवं दिखावे की राजनीति थी। सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय आईपीडी टॉवर को लेकर भी सिर्फ झूठ फैलाया। इसका सिविल वर्क लगभग पूरा हो गया, उपकरणों की खरीद का कार्य प्रगति पर है। गहलोत साहब भूल गए कि उनके कार्यकाल के पहले 2 साल में एक भी पीएचसी नहीं खोली गई, जबकि भजनलाल सरकार ने 6 नई पीएचसी स्थापित की। कांग्रेस ने पहले 2 साल में 53 सीएचसी, भजनलाल सरकार ने 84 सीएचसी खोली, उप जिला अस्पताल गहलोत के कार्यकाल में 1, भजनलाल सरकार ने 61, जिला अस्पताल गहलोत के कार्यकाल में 3 तो भजनलाल सरकार ने 14 और सेटेलाइट अस्पताल 2 के मुकाबले 18 खोलने का कार्य किया है। इतना ही नहीं, भजनलाल सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में दो साल में 50000 से अधिक भर्तियां की, 14 हजार से अधिक प्रक्रियाधीन है, जबकि गहलोत सरकार ने 5 साल में ही महज 29 हजार पदों पर ही भर्तियां की थी। पहले 49 जिला अस्पताल थे, आज 63 है। गहलोत साहब मेडिकल कॉलेज को लेकर भ्रम फैला रहे है,जबकि हकीकत यह है कि 2016 तक राजस्थान में सिर्फ 8 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 23 नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए।
सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि गहलोत ने चुनावी साल में घोषणाओं की बाढ़ ला दी थी, शिलान्यास तो कर दिए, लेकिन उनके लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान तक नहीं किया था। गहलोत ने 5 साल में 4148 घोषणाएं की थी, जिनमें से 2208 पूरी ही नहीं हुई। 626 घोषणाएं तो ऐसी थी जिन पर एक रुपए तक खर्च नहीं हुआ। जबकि भजनलाल सरकार ने 2719 बजट घोषणाएं की, जिसमें से 90 फीसदी पर स्वीकृतियां जारी कर दी गई है। 34 प्रतिशत में कार्य पूर्ण हो गया, 56 प्रतिशत प्रगतिरत है और 10 प्रतिशत पर कार्य प्रारंभ होना है। महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट हो या दिव्यांग विश्व विद्यालय, गहलोत ने सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया। सिविल लाइन्स आरओबी लेकर गहलोत साहब सफेद झूठ बोल रहे है। 2021 में शुरू होने वाली योजना में 2022 तक सिर्फ 9 प्रतिशत कार्य हुआ। कांग्रेस के कार्यकाल में सिर्फ 20 प्रतिशत काम ही हुआ था। जबकि भाजपा सरकार आने के बाद इसे तेजी से किया जा रहा है। 70 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। भाजपा सरकार ने कार्य में देरी के लिए संबंधित एजेंसी पर 1 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया है। दिसंबर 2026 तक इसका कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि "छाज बोले तो बोले छलनी भी बोली जिस में सत्तर छेद" कहावत गहलोत साहब पर चरितार्थ हो रही है। जोधपुर से आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने जोधपुर के विकास के लिए बड़ी बड़ी घोषणाएं तो की थी, लेकिन जब काम करने का समय आया तो खर्च शून्य, काम शून्य और परिणाम शून्य रहा। 765 केवी सब स्टेशन के लिए 3 हजार करोड़ का बजट बताया गया, जबकि खर्च शून्य, 400 केवी सब स्टेशन के लिए 500 करोड की घोषणा की गई, लेकिन काम शुरू तक नहीं हुआ। शेरगढ में पेयजल परियोजना के लिए 154 करोड़ रुपए की घोषणा की गई, लेकिन खर्च एक रुपया तक नहीं किया। ऐसी कई योजनाएं है जो जोधपुर के लिए की गई थी, लेकिन गहलोत ने बजट तक नहीं दिया। जबकि भजनलाल सरकार ने समूचे प्रदेश के लिए विकास का रोड मैप तैयार किया और उसको पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य किया। 420 पेपरलीक आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। प्रदेश में 351 से अधिक परीक्षाएं बिना पेपरलीक करवाई। सवा लाख अधिक नियुक्तियां दी, 1.33 लाख प्रक्रियाधीन और 1.25 लाख पदों पर भर्ती कैलेंडर जारी किया। गहलोत साहब खीझ मिटाने के लिए सोशल मीडिया पर गलत तथ्यों के साथ ट्विट कर रहे है, यह सही नहीं है।
0 Response to "Rajasthan: इंतजार शास्त्र की जगह करें इजहार नामा: तिवाड़ी"
एक टिप्पणी भेजें