Nahargarh Biological Park: मां की ममता कम पड़ी तो 'नियोनेटल केयर' ने संवारी नन्ही जान, नाहरगढ़ के नन्हे मेहमान अब स्वस्थ
शनिवार, 9 मई 2026
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जयपुर। नाहरगढ़ जैविक उद्यान से एक सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। उद्यान में जन्में दो नन्हे बाघ शावकों के जीवन पर मंडराता संकट अब टल चुका है। वन्यजीव चिकित्सकों की 24 घंटे की मुस्तैदी और अत्याधुनिक मेडिकल केयर की बदौलत, 'मदर नेचर' की कमी को विज्ञान और संवेदना ने मिलकर पूरा कर दिया है।
अब दिख रहा है सुधार: खोल ली हैं आंखें
ताजा अपडेट के अनुसार दोनों शावक अब पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं। उन्होंने अपनी आंखें खोल ली हैं और उनकी गतिविधियां बिल्कुल सामान्य पाई गई हैं। चिकित्सा परीक्षणों की रिपोर्ट भी सकारात्मक आई है। सबसे उत्साहजनक बात यह है कि केयर यूनिट में आने के बाद से उनके वजन में निरंतर वृद्धि हो रही है और उनकी डाइट भी धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है। शावकों की हर हलचल पर कैमरों के जरिए 24 घंटे पैनी नजर रखी जा रही है। मां के दूध के अभाव को पूरा करने के लिए उन्हें विदेश से आयातित दूध, जरूरी विटामिन, मिनरल्स और विशेष दवाइयां दी जा रही हैं। प्रतिदिन स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।
जब ममता पर भारी पड़ा असामान्य व्यवहार
उद्यान की टाइगर सफारी में बाघिन 'भक्ति' ने 18 अप्रैल को दो शावकों को जन्म दिया था, लेकिन खुशियों के बीच चिंता तब बढ़ गई जब भक्ति ने शावकों के प्रति असामान्य व्यवहार दिखाना शुरू कर दिया। उसने नन्हे शावकों को दूध नहीं पिलाया, जिससे उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 'पशु चिकित्सा पॉलीक्लिनिक पांच बत्ती' द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने तुरंत हस्तक्षेप किया। बोर्ड की अनुशंसा पर दोनों शावकों को नियोनेटल केयर यूनिट (NCU) में शिफ्ट किया गया। यहां वन्यजीव चिकित्सकों की एक विशेष टीम ने 'हैंड रियरिंग' (मानवीय देखरेख में पालन-पोषण) का जिम्मा संभाला।
खास है यह जोड़ा
उल्लेखनीय है कि बाघिन भक्ति को वर्ष 2024 में पुणे जू से वन्यजीव एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाया गया था, जबकि उसके नर पार्टनर को नागपुर चिड़ियाघर से जयपुर लाया गया था। इन शावकों का जन्म नाहरगढ़ में बाघों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
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