1952 से लेकर अब तक 9 बार हो चुकी एसआईआर, सर्वाधिक शासन कांग्रेस का, तो फिर अब विरोध क्यों ?
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
Comment
2018 में कांग्रेस ने ही चुनाव आयोग से 42 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की थी, फिर अब एसआईआर पर सवाल उठाना विरोधाभासी
जयपुर। भारतीय जनता पार्टी एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और मतदाता सूची को पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया बताया। रावत ने कहा कि राजस्थान में वर्ष 2018 में कांग्रेस ने ही चुनाव आयोग से 42 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की थी। ऐसे में आज एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाना कांग्रेस के पूर्व के रुख से विरोधाभासी है। मतदाता सूची का शुद्धिकरण किसी राजनीतिक दल को लाभ या हानि पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। रावत ने कहा कि वर्तमान में देश के नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन एवं विश्वसनीय बनाए रखना निर्वाचन आयोग के मुख्य दायित्वों में शामिल है।
मोर्चा अध्यक्ष एवं सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भी भागीदारी रहती है। बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के माध्यम से विभिन्न राजनीतिक दल अपने प्रतिनिधि नियुक्त करते हैं, जो इस प्रक्रिया में सहभागी होते हैं। भाजपा के 9 लाख सहित सभी विपक्षी दलों के करीबन 46 लाख बीएलए इस प्रक्रिया में शामिल हुए। ऐसे में यदि कांग्रेस इस प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह अपने ही नियुक्त प्रतिनिधियों की भूमिका और कार्यप्रणाली पर अविश्वास कर रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विषय पर सवाल उठाना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन तथ्यों और प्रक्रिया के आधार पर चर्चा करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनमें मृत मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों और अनुपस्थित मतदाताओं से संबंधित मामले शामिल हैं। करीब 2.89 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, 1.01 करोड़ डुप्लीकेट प्रविष्टियां बताई गई हैं। इन आंकड़ों के संदर्भ में पूरी प्रक्रिया और उसके विभिन्न चरणों को समझना आवश्यक है, ताकि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके।
भाजपा एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मन्नालाल रावत ने कहा कि राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित विपक्ष के नेताओं द्वारा एसआईआर पर उठाए जा रहे सवालों के बीच यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कांग्रेस पहले स्वयं मतदाता सूची के शुद्धिकरण की आवश्यकता व्यक्त कर चुकी है। केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी एसआईआर की प्रक्रिया के संदर्भ में राजनीतिक दलों के रुख और वहां की परिस्थितियों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा की जानी चाहिए। मतदाता सूची का शुद्धिकरण किसी दल विशेष के हितों से ऊपर लोकतंत्र के व्यापक हित से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। स्वतंत्रता के बाद भारतीय लोकतंत्र में विभिन्न समय पर मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं। आजादी के बाद से अब तक 9 एसआईआर प्रक्रिया पुरी हो चुकी। मतदाता सूची का नियमित सत्यापन लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए समय समय पर एसआईआर अत्यंत आवश्यक है। एसआईआर को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बनाने के बजाय इसे मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और लोकतंत्र की मजबूती के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। कांग्रेस को एसआईआर की प्रक्रिया पर तथ्यपरक चर्चा करनी चाहिए और लोकतंत्र को मजबूत बनाने वाली इस प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए। निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय मतदाता सूची ही स्वस्थ लोकतंत्र की मजबूत नींव है।
#SIR #VoterListPurification #MannalalRawat #BJP #BJYM #ElectionCommission #Democracy #JaipurNews #RajasthanNews #Politics #VoterID #IndianDemocracy #NewsUpdate
0 Response to "1952 से लेकर अब तक 9 बार हो चुकी एसआईआर, सर्वाधिक शासन कांग्रेस का, तो फिर अब विरोध क्यों ? "
एक टिप्पणी भेजें